धरती माता
धरती माता हम सबके जीवन का आधार है। हम धरती पर जन्म लेते हैं।
धरती पर ही बढ़ते हैं, जीते हैं और परिपक्व होते हैं। जीवन का सारा आनंद उठाते हैं। और अंत में उसी में समा जाते हैं।
हमारे समस्त कार्य-कलापों का प्रांगण धरती माँ ही है।
धरती पर ही अनेक सभ्यतायें आईं , पनपीं और अपने छाप छोड़ गईं।
इस प्रकार मानवता का विकास होता गया। और आज हम इस आधुनिक युग में जी रहें हैं।
आज हम विज्ञान को बहुत अधिक महत्व दे रहे हैं। यह ठीक है पर सब की एक मर्यादा होती है।
मर्यादा( Bandwidth) भीतर ही हमारा अस्तित्व कायम रह सकता है। इस सत्य को हमें समझना चाहिये।
मर्यादा का अतिक्रमण करने से हमारा अस्तित्व समाप्त हो सकता है। पहले उसकी चेतावनी मिलती है फिर बाद में विनाश का आगमन आता है।
Thursday, July 30, 2009
Subscribe to:
Comments (Atom)