युग-परिवर्तन
श्री माता जी निर्मला देवी ने हमको, सहज में आत्मसाक्षात्कार दिया।
सहजयोग सा महायोग दिया, हमको, महामानव का आकार दिया॥१॥
युग बदल दिया श्री माता जी ने, आधुनिक युग में कृतयुग आया।
कलियुग चला गया, आज अब सतयुग आया ॥२॥
विश्व-निर्मला-धर्म को, आब हम अपनाये हैं।
सब कुछ त्याग कर, माँ निर्मला की शरण में आये हैं॥३॥
अनेकों इंसान सहजयोगी बने, देश-काल की सीमाओं को टोडा़।
विनाश की ओर उन्मुख मानवता को, अमरता की ओर मोडा़॥४॥
चाहे कोई कुछ भी कहे, सत्य को हमने अब जान लिया है।
झूठे कारनामों को देख, झूठे व्यक्तित्वों को पहिचान लिया है॥५॥
अब तो केवल एक ही विचार है, सहजयोगी सबको बनना है।
सबका कल्याण हो इसीलिये उनको, माँ निर्मला की शरण में लाना है॥६॥
जीते जी कार्य सहज का, हम सब करते ही रहेंगे।
मरणोंपरान्त पुनर्जन्म लेंगे, हर बार आत्मसाक्षातकार देते रहेंगे॥७॥
यह सिलसिला तब तक, चलता ही रहेगा।
हर इंसान जब तक, आत्मसाक्षात्कार पा न लेगा॥८॥
तब पूर्णत: इस जग में, साम्राज्य प्रभु का आ जायेगा।
सतयुग के आनंद का, वर्णन किया नहि जायेगा॥९॥
श्री माता जी निर्मला देवी ने हमको, सहज में आत्मसाक्षात्कार दिया।
सहजयोग सा महायोग दिया, हमको, महामानव का आकार दिया॥१॥
युग बदल दिया श्री माता जी ने, आधुनिक युग में कृतयुग आया।
कलियुग चला गया, आज अब सतयुग आया ॥२॥
विश्व-निर्मला-धर्म को, आब हम अपनाये हैं।
सब कुछ त्याग कर, माँ निर्मला की शरण में आये हैं॥३॥
अनेकों इंसान सहजयोगी बने, देश-काल की सीमाओं को टोडा़।
विनाश की ओर उन्मुख मानवता को, अमरता की ओर मोडा़॥४॥
चाहे कोई कुछ भी कहे, सत्य को हमने अब जान लिया है।
झूठे कारनामों को देख, झूठे व्यक्तित्वों को पहिचान लिया है॥५॥
अब तो केवल एक ही विचार है, सहजयोगी सबको बनना है।
सबका कल्याण हो इसीलिये उनको, माँ निर्मला की शरण में लाना है॥६॥
जीते जी कार्य सहज का, हम सब करते ही रहेंगे।
मरणोंपरान्त पुनर्जन्म लेंगे, हर बार आत्मसाक्षातकार देते रहेंगे॥७॥
यह सिलसिला तब तक, चलता ही रहेगा।
हर इंसान जब तक, आत्मसाक्षात्कार पा न लेगा॥८॥
तब पूर्णत: इस जग में, साम्राज्य प्रभु का आ जायेगा।
सतयुग के आनंद का, वर्णन किया नहि जायेगा॥९॥
No comments:
Post a Comment