सहजानुभूतियाँ
मैं कौन हूँ? आया कहाँ से, कौन है मेरे अस्तित्व का आधार।
इस प्रश्न का उत्तर देने, धरती पर आये अनेक अवतार॥ १॥
पर किसी को नहीं समझा पाये वे, अर्थ उनके जीवन का।
क्योंकि समय नहीं आया था, उनके पुनर्जीवन का॥२॥
जब से सहजयोग आया तब से, हुआ सबको यह आभास।
इंसान के भीतर ही विद्यमान, है परमात्मा का प्रकास॥३॥
यही है सबके जीवन का आधार।
यही है निर्गुण निराकार॥४॥
आत्मा ही है परमात्मा की परछाँई।
श्री निर्मला माता जी ने सबको, सहज में दिखाई॥५॥
मैं कौन हूँ का उत्तर, मिल गया सहज में।
सब अस्तित्वों का अस्तित्व, मिल गया सहज में॥६॥
मैं कौन हूँ? आया कहाँ से, कौन है मेरे अस्तित्व का आधार।
इस प्रश्न का उत्तर देने, धरती पर आये अनेक अवतार॥ १॥
पर किसी को नहीं समझा पाये वे, अर्थ उनके जीवन का।
क्योंकि समय नहीं आया था, उनके पुनर्जीवन का॥२॥
जब से सहजयोग आया तब से, हुआ सबको यह आभास।
इंसान के भीतर ही विद्यमान, है परमात्मा का प्रकास॥३॥
यही है सबके जीवन का आधार।
यही है निर्गुण निराकार॥४॥
आत्मा ही है परमात्मा की परछाँई।
श्री निर्मला माता जी ने सबको, सहज में दिखाई॥५॥
मैं कौन हूँ का उत्तर, मिल गया सहज में।
सब अस्तित्वों का अस्तित्व, मिल गया सहज में॥६॥
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